देश-दुनिया में महिला दिवस से जुड़े तमाम आयोजनों की धूम के दौर में महिला सशक्तीकरण की चर्चा स्वाभाविक है। वैसे हमारे देश की संस्कृति में सदियों से महिला सशक्तीकरण समाया हुआ है। समकालीन संदर्भों में इसका आशय सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सुरक्षा प्रतिष्ठान में महिलाओं की स्थिति में सुधार से है। इसके लिए आवश्यक होगा कि महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जाएं ताकि वे समाज में अपनी और प्रभावी भूमिका निभा सकें। इसके लिए महिला सशक्तीकरण का अनुकूल परिवेश बनाना हम सभी का साझा लक्ष्य होना चाहिए। इसका नतीजा उस माहौल के रूप में निकलना चाहिए जहां महिलाएं किसी भी तरह के कामकाज में स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। महिलाओं को परिवार एवं समाज में पुरुषों के समकक्ष भूमिकाएं निभानी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के भेदभाव या अभाव का कोई प्रश्न ही न उठे।
प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला हितों को व्यापक दृष्टिकोण से देखते हुए कई पहल की हैं। महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर अवसर प्रदान करने का प्रयास किया है। हमारी सरकार के लिए महिला सशक्तीकरण महज एक नारा न होकर, सुरक्षा के पांच पहलुओं पर आधारित एक व्यापक मिशन है। ये पांच पहलू हैं-मां एवं शिशु की स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय सुरक्षा, शैक्षणिक एवं वित्तीय कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य की सुरक्षा और अंत में महिलाओं की सलामती।
तमाम सक्षम महिला अधिकारियों ने अपने पराक्रम से उन लोगों की धारणाओं को तोड़ा है जो शायद यह सवाल उठाते हों कि सैन्य बलों में भला वे क्या भूमिका निभा सकती हैं। सैन्य बलों में महिला अधिकारी बीते 80 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने पूरी क्षमताओं और उत्कृष्टता के साथ काम किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आज महिलाएं रक्षा उत्पादन इकाइयों, रक्षा अनुसंधान के साथ ही सैन्य बलों में अपना लोहा मनवा रही हैं।
सैन्य बलों में महिला सशक्तीकरण बीते पांच वर्षों में हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है और इस दौरान कई प्रवर्तनकारी पहल भी की गई हैं। वर्ष 2019 में सेनाकर्मियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 3.89 प्रतिशत, वायुसेनाकर्मियों में 13.28 प्रतिशत और नौसेनाकर्मियों में 6.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। वर्ष 2016 से पहले भारतीय सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी महज 2.5 प्रतिशत थी।
महिला दिवस के अवसर पर कुछ मिसाल बनी अधिकारियों के योगदान का स्मरण भी आवश्यक है जिन्होंने साबित किया कि जब देश की सुरक्षा की बात आए तो महिलाएं किसी से कमतर नहीं। कम ही लोग जानते हैं कि बालाकोट एयर स्ट्राइक में स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल फाइटर कंट्रोलर की भूमिका में थीं। दुश्मन को कड़ा सबक सिखाने वाले इस अभियान में अद्भुत प्रदर्शन के लिए उन्हें युद्ध सेवा पदक प्रदान किया गया। पिछले साल मई में फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ पहली महिला पायलट बनीं जिन्होंने लड़ाकू विमान में कॉम्बैट मिशन के लिए क्वालिफाई किया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ में महिलाओं को बराबरी के अवसर दिए जा रहे हैं ताकि वे अपनी क्षमताओं का पूरा लाभ उठाकर देश के लिए उत्कृष्ट रक्षा तकनीक विकसित कर सकें। आज संस्थान में कई शीर्ष पदों पर महिला वैज्ञानिक विराजमान हैं। लोग शायद यह जानकर हैरान होंगे कि देश की कुछ अग्र्रणी मिसाइल वैज्ञानिक महिलाएं हैं। वर्ष 2018 में महिला अधिकारियों के जत्थे ने आइएनएसवी तारिणी के जरिये पूरे ग्लोब का चक्कर लगाने की उपलब्धि अर्जित की थी। समय के साथ विभिन्न मोर्चों पर सैन्य बलों में महिलाओं ने खूब दमखम दिखाकर साबित किया है वे किसी से कम नहीं।
महिलाओं की ये उपलब्धियां सामरिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं। हमारी सरकार के तमाम कदमों से महिलाओं का आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण भी हुआ है। जैसे मुद्रा योजना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की बुनियाद रखी है। इसमें संदेह नहीं कि सरकार सही दिशा में प्रयास कर रही है, लेकिन अभी भी देश में और जागरूकता की दरकार है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे कार्यक्रमों का व्यापक असर हुआ है। इससे लैंगिक अनुपात सुधरा और जागरूकता भी बढ़ी है।
महिलाओं को सशक्त बनाने में भारत ने खूब तरक्की की है, पर अभी भी काफी कुछ करना होगा। ‘स्त्री शक्ति’ ‘राष्ट्र शक्ति’ का अभिन्न अंग है और अपनी ‘शक्ति’ को सशक्त बनाए बिना हम ‘शक्तिशाली भारत’ का निर्माण नहीं कर सकते।